बूढ़ा बाप

बूढ़ा बाप

लौट आता हूँ देर शाम थक-हारकर वहीं, जहाँ से कह के निकला था कि अब न लौटूंगा कभी, चाहे कुछ हो जाए भटक जाऊंगा कहीं वीरान जंगलों में या ल...
वह लौट आयी

वह लौट आयी

पिताजी लौट आए देर रात थक-हारकर बाजार की हर गली हर चौराहे ही नहीं झाड़ियों और नालों में खोजकर वह नहीं मिली, कहीं भी नहीं! माँ की आँखे...
आॅन-लाईन

आॅन-लाईन

          लगातार बारिश होने से जगेसर की खेत में घुटना भर पानी लग गया। उसने मेड़ पर और भी मिट्टी चढ़ाकर ऊँचा कर दिया और हल-बैल ले जाकर खेत क...
जीत या हार

जीत या हार

उसने काट लिये सिर सौ वीर सपूतों के सूनी हो गयी सौ मांगें अनाथ हो गये हैं बच्चे आँसुओं के साथ ही बह गयी माँ की आँखें! पर हारे नहीं हैं...
वर्तमान समय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा : दशा एवं दिशा

वर्तमान समय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा : दशा एवं दिशा

           भारत आज कई क्षेत्रों में दुनिया से आगे है। उनके पास तमाम साधन, संसाधन, तकनीकी शक्ति, सामरिक -शक्ति तथा पर्याप्त जन- शक्ति है। पर...
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में सूचना और संचार तकनीक की भूमिका

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में सूचना और संचार तकनीक की भूमिका

             किसी भी राष्ट्र अथवा समाज के विकास में शिक्षा की भूमिका अहम् होती है।लेकिन शिक्षा की भूमिका तभी सकारात्मक मानी जा सकती है, जब ...
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और महिला सशक्तिकरण

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और महिला सशक्तिकरण

        महिला और पुरुष, विकास रूपी गाड़ी के दो पहिये हैं। अगर एक पहिया कमज़ोर हो तो गाड़ी अधिक दूर तक नहीं जा सकती। अतएव विकास की गाड़ी को ...
भाषणवाज

भाषणवाज

लघुकथा :                       वर्मा जी सबेरे से भाषण लिखकर रट्टा मार रहे थे। उन्हें आज 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' पर भाषण देना था...
साँढ़

साँढ़

लघुकथा :           सदियों से गुलामी के शिकार बैलों ने अपनी मुक्ति की लड़ाई लड़ने के लिए एक बैल को साँढ़ बना दिया। साँढ़ खा- पीकर खूब मोटा...
कुकरधर्म

कुकरधर्म

अति लघुकथा                  जिस दिन कोई कुत्ता अपनी रोटी के लिए नहीं, कुकरधर्म के कारण अपने मालिक को काटने दौड़ेगा, उस दिन से देश की  ...
बस, पाँच साल

बस, पाँच साल

उसने कहा कि हमें पाँच साल दो, बस पाँच साल, सब कुछ बदल के रख देंगे हमने दिये पाँच साल उसने बदल दिये अपने कपड़े उसने बदल दिये अपने घर ...
विकास का वादा

विकास का वादा

विकास गुम हो गया कहीं किसी अमीरों की गली में उसे नेताजी खोजकर ला ही रहे थे गरीबों की बस्ती तक वादे के अनुरूप कि बीच में ही किसी ने कर ल...