(1) गागर में सागर
उत्तर :- गागर लघुता का प्रतीक है और सागर विशालता का। अतएव गागर में सागर का अर्थ है- लघुता में विशालता का समावेश। हिन्दी साहित्य में इस शब्द का प्रयोग रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि बिहारीलाल के दोहे के संदर्भ में किया जाता है। रीतिकाल के अन्य कवि जहाँ चौपाई, सवैया, रोला तथा छप्पय जैसे बड़े छंदों का प्रयोग कर अपनी भावाभिव्यक्ति कर रहे थे, वहीं बिहारीलाल दोहे जैसे छोटे छंद के माध्यम से भक्ति, नीति तथा श्रृंगार की अविरल धारा प्रवाहित कर हिन्दी साहित्य को समृद्ध बना रहे थे। उनके दोहे के बारे में यह कथन प्रचलित है :
"सतसईया के दोहरे अरु नावक के तीर।
देखन में छोटन लगे, घाव करे गंभीर।।"
बिहारीलाल ने दोहा छंद में 713 पदों का ग्रंथ 'सतसई' लिखकर दोहे को अमर कर दिया। और दोहे के बहाने स्वयं भी अमर हो गये। अतएव बिहारी के संदर्भ में प्रयुक्त यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण तथा सटीक है।
डॉ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
उत्तर :- गागर लघुता का प्रतीक है और सागर विशालता का। अतएव गागर में सागर का अर्थ है- लघुता में विशालता का समावेश। हिन्दी साहित्य में इस शब्द का प्रयोग रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि बिहारीलाल के दोहे के संदर्भ में किया जाता है। रीतिकाल के अन्य कवि जहाँ चौपाई, सवैया, रोला तथा छप्पय जैसे बड़े छंदों का प्रयोग कर अपनी भावाभिव्यक्ति कर रहे थे, वहीं बिहारीलाल दोहे जैसे छोटे छंद के माध्यम से भक्ति, नीति तथा श्रृंगार की अविरल धारा प्रवाहित कर हिन्दी साहित्य को समृद्ध बना रहे थे। उनके दोहे के बारे में यह कथन प्रचलित है :
"सतसईया के दोहरे अरु नावक के तीर।
देखन में छोटन लगे, घाव करे गंभीर।।"
बिहारीलाल ने दोहा छंद में 713 पदों का ग्रंथ 'सतसई' लिखकर दोहे को अमर कर दिया। और दोहे के बहाने स्वयं भी अमर हो गये। अतएव बिहारी के संदर्भ में प्रयुक्त यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण तथा सटीक है।
डॉ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
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