टिप्पणी :-
(1) ऊपर से तितली और भीतर से मधुमक्खी...।
उत्तर :- प्रस्तुत गद्यांश प्रेमचंद रचित महाकाव्यात्मक उपन्यास 'गोदान' में मिस मालती के लिए कहा गया है। मालती गोदान की शहरी पात्र है, जो इंग्लैण्ड से डाक्टरी पढ़कर आयी है। उसके वेश-वूषा पर पूरी तरह पश्चिमी संस्कारों का प्रभाव है। वह पुरुष मनोविज्ञान की गहरी जानकारी रखती है, जिसके बल पर अपने आसपास के सभी पुरुषों को आगे-पीछे घुमाती है, पर लेखक ने जोर देकर कहा है कि मालती यद्यपि पश्चिमी रंग -ढंग का जीवन जीती है पर वह हृदय से पूरी तरह भारतीय नारी है। यह अलग बात है कि लोगों को उनका तितलीपन ही अधिक दिखता है, मालती जनसेवा में अपना जीवन समर्पित कर देती है। वह विवाह तक नहीं करती हैं। उन पर गांधीवाद का पूरा प्रभाव परिलक्षित होता है।
यह संदर्भ आज और भी अधिक प्रासंगिक है क्योंकि आज की स्त्रियाँ पश्चिमी सभ्यता के अनुकरण के चक्कर में भारतीय संस्कारों को ताख पर रख देती हैं।
डॉ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
(1) ऊपर से तितली और भीतर से मधुमक्खी...।
उत्तर :- प्रस्तुत गद्यांश प्रेमचंद रचित महाकाव्यात्मक उपन्यास 'गोदान' में मिस मालती के लिए कहा गया है। मालती गोदान की शहरी पात्र है, जो इंग्लैण्ड से डाक्टरी पढ़कर आयी है। उसके वेश-वूषा पर पूरी तरह पश्चिमी संस्कारों का प्रभाव है। वह पुरुष मनोविज्ञान की गहरी जानकारी रखती है, जिसके बल पर अपने आसपास के सभी पुरुषों को आगे-पीछे घुमाती है, पर लेखक ने जोर देकर कहा है कि मालती यद्यपि पश्चिमी रंग -ढंग का जीवन जीती है पर वह हृदय से पूरी तरह भारतीय नारी है। यह अलग बात है कि लोगों को उनका तितलीपन ही अधिक दिखता है, मालती जनसेवा में अपना जीवन समर्पित कर देती है। वह विवाह तक नहीं करती हैं। उन पर गांधीवाद का पूरा प्रभाव परिलक्षित होता है।
यह संदर्भ आज और भी अधिक प्रासंगिक है क्योंकि आज की स्त्रियाँ पश्चिमी सभ्यता के अनुकरण के चक्कर में भारतीय संस्कारों को ताख पर रख देती हैं।
डॉ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
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