उधरुआ जात

उधरुआ जात

कहानी           उस रात न तो दादी को नींद आयी  न मुझे।चाचा जी उधर अलग बार-बार करवट फेर रहे थे।लेकिन दादा जी आराम से खर्राटे ले रहे थे।ले भ...
जिन्दगी का जंग

जिन्दगी का जंग

कहानी मेढ़क  का टर्र-टर्र और पंडुक की टिहुक-टिहुक के साथ कोशी नदी की कल-कल की ध्वनि अंधेरी रात की निःशब्दता को भंग कर रही थी। पूरा गाँव...
अतिक्रमण

अतिक्रमण

सुबह का समय और गर्मी का मौसम,जिसमें रमजानी अपना तरकारी वाला ठेला गरकाते हुए बाजार की ओर चला था।मन में अनंत कामनाएँ हिलोरें ले रही थीं।कल ई...