परिचय

परिचय

नाम : डाॅ. उमेश कुमार शर्मा जन्म : 15 अगस्त, 1985 ई., सहरसा (बिहार) योग्यता : एम.ए., पी-एच.डी. (हिन्दी)              नेट/जेआरएफ/एसआरएफ उत्ती...
अभिशाप

अभिशाप

कितना क्लांत, कितना व्यस्त ! चिर- द्रवित, पीड़ित अनन्त श्रम का फिर भी कितना उपहास! कर अट्टहास सुख उन्मूलित जीवन है कितना उदास ! कैसा अखंड, क...
बेदख़ल

बेदख़ल

प्रियतम! तुमने तन मांगा हमने दे दिया तुमने मन मांगा हमने दे दिया तुमने जीवन मांगा हमने दे दिया तुमने समर्पण मांगा हमने दे दिया। प्रियतम! तुम...
तुम्हारे लिए नहीं बनी है यह दुनिया

तुम्हारे लिए नहीं बनी है यह दुनिया

 गरीबों! तुम्हारे लिए नहीं बनी है यह दुनिया यह दुनिया उसके लिए बनी हैं जिसके लिए तुम बने हो। लेकिन तुम  यह नहीं कह सकते कि तुम्हारे लिये कुछ...
माँ का हाल

माँ का हाल

माँ का हाल उसे मत पूछो              जिसकी अपनी माँ हो। माँ का हाल उसे भी पूछो            उजड़ा जिसका जहां हो।। माँ हो बस उनकी यादों मे...
चोट

चोट

हम करते रहेंगे चोट तुम्हारी व्यवस्था पर तुम्हारी संस्कृति पर तुम्हारी सभ्यता पर जैसे करते हैं हम चोट भारी-भरकम हथौड़े से गर्म- लाल लो...
व्याख्या : अष्टम पत्र (एम.ए.द्वितीय छमाही, सत्र-2019-21)

व्याख्या : अष्टम पत्र (एम.ए.द्वितीय छमाही, सत्र-2019-21)

          प्रश्न : 'बुंदेलखंड की जमीन के कतरे-कतरे में कसक थी। छोटी-छोटी रियासतों तथा जागीरों के घाव रिस रहे थे। उन घावों में असीम पीड़...
लावारिश

लावारिश

कहानी :  लावारिश             पूस का महीना और कँपकपाती अंधेरी रात,जिसमें कुहरे के विशालकाय पर्वत को दो फाँक करते हुए, सर्द पछुआ हवा से टकर...