माँ का हाल उसे मत पूछो
जिसकी अपनी माँ हो।
माँ का हाल उसे भी पूछो
उजड़ा जिसका जहां हो।।
माँ हो बस उनकी यादों में
हो यादों का साया।
भूखा-नंगा जीवन जिसका
मौत भी हो शरमाया।।
हो ताक जब दुग्धपान का
माँ की लाश पड़ी हो।
मिली न हो सूखी रोटी भी
आफत में जान पड़ी हो।।
खाकर मार किसी से भी वह
कोने में सोया हो।
मिला न हो स्नेह किसी का
फूट-फूट रोया हो।।
माँ का हाल उसे पूछो तो
बस रोना आता हो।
'मातृ-दिवस' आकर भी उसको
दुःख ही दे जाता हो।।
डाॅ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार एवं ब्लाॅगर
संपर्क- 6201464897
जिसकी अपनी माँ हो।
माँ का हाल उसे भी पूछो
उजड़ा जिसका जहां हो।।
माँ हो बस उनकी यादों में
हो यादों का साया।
भूखा-नंगा जीवन जिसका
मौत भी हो शरमाया।।
हो ताक जब दुग्धपान का
माँ की लाश पड़ी हो।
मिली न हो सूखी रोटी भी
आफत में जान पड़ी हो।।
खाकर मार किसी से भी वह
कोने में सोया हो।
मिला न हो स्नेह किसी का
फूट-फूट रोया हो।।
माँ का हाल उसे पूछो तो
बस रोना आता हो।
'मातृ-दिवस' आकर भी उसको
दुःख ही दे जाता हो।।
डाॅ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार एवं ब्लाॅगर
संपर्क- 6201464897
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