कविता : लड़की
लड़की,
कितना कुछ
सह जाती है.....
जन्म से मरण तक
आदि से अंत तक
उजाड़ से बसंत तक
दिशा से दिगंत तक!
लड़की,
अक्सर घोंट जाती है
मान और अपमान को
सुख और सम्मान को
शीत, धूप, घाम को.....!
लड़की,
जीती है औरों के लिए
मरती है औरों के लिए
खटती है औरों के लिए
बँटती है औरों के लिए।
लड़की,
पी जाती है जहर
सबको अमृत पिलाकर
फिर भी वह लड़की ही होती है
वह नीलकंठ क्यों नहीं होती.......!
डाॅ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार एवं ब्लाॅगर
लड़की,
कितना कुछ
सह जाती है.....
जन्म से मरण तक
आदि से अंत तक
उजाड़ से बसंत तक
दिशा से दिगंत तक!
लड़की,
अक्सर घोंट जाती है
मान और अपमान को
सुख और सम्मान को
शीत, धूप, घाम को.....!
लड़की,
जीती है औरों के लिए
मरती है औरों के लिए
खटती है औरों के लिए
बँटती है औरों के लिए।
लड़की,
पी जाती है जहर
सबको अमृत पिलाकर
फिर भी वह लड़की ही होती है
वह नीलकंठ क्यों नहीं होती.......!
डाॅ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार एवं ब्लाॅगर
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