मैं नहीं लिख पाता
खिलते हुए गुलाब
बहती हुई नदियाँ
बाग या बहार
या फिर पुष्पों के
आगोश में फंसे
भँवरे की गुंजार
कि मन बहल जाए
मैं लिखता हूँ
भूखे की भूख
गरीब की रोटी
आबरू बेटी की
पिता का उदास चेहरा
बूढ़े के माथे की सिकन
एक अबला माँ का प्यार
मैं लिखता हूँ
गरीब की झोपड़ी
टूटी हुई खाट
तार से टंगा दीया
टूटी हुई सड़क
फटेहाल किसान
उसका उदास बैल
और टूटते-बिखरते सपने
कि किसी का दिल दहल जाए।
डाॅ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
खिलते हुए गुलाब
बहती हुई नदियाँ
बाग या बहार
या फिर पुष्पों के
आगोश में फंसे
भँवरे की गुंजार
कि मन बहल जाए
मैं लिखता हूँ
भूखे की भूख
गरीब की रोटी
आबरू बेटी की
पिता का उदास चेहरा
बूढ़े के माथे की सिकन
एक अबला माँ का प्यार
मैं लिखता हूँ
गरीब की झोपड़ी
टूटी हुई खाट
तार से टंगा दीया
टूटी हुई सड़क
फटेहाल किसान
उसका उदास बैल
और टूटते-बिखरते सपने
कि किसी का दिल दहल जाए।
डाॅ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
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