मालिक की माँ का यूँ ही मुँह उठाकर गाँव से आ जाना और उसके निजी कमरे में महीने भर के लिए सिफ्ट हो जाना गोलू को बहुत अखर रहा था। बुढ़िया का पूरी रात छींकने और खों-खों करते रहने से उसके नींद में खलल पड़ता था। गोलू भूखा रह सकता है, पर नींद के साथ कोई समझौता नहीं कर सकता है! यहाँ मालिक वाली बात थी। वह भी मालकिन की तरह कुंढ़कर रह जाता।
आखिरकार माँ का ईलाज पूरा हुआ। वह गाँव वापस जाने की तैयारी करने लगी। आज वह नहा- धोकर तैयार हो रही थी। मालिक उदास थे! पर मालकिन और उनके बच्चे प्रसन्न थे!
सारे लोग माँ को नीचे गाड़ी तक छोड़ने गये। मालिक को छोड़कर सभी के चेहरे पर बनावटी उदासी छायी थी, पर गोलू को बनावटीपन कहीं से पसंद नहीं था। वह आज कमरे से ही भौंक-भौंक कर बुढ़िया के जाने की खुशी मना रहा था। मालिक समझ ही पा रहे थे कि इस कुत्ते को आज हुआ क्या है???
डॉ.उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
आखिरकार माँ का ईलाज पूरा हुआ। वह गाँव वापस जाने की तैयारी करने लगी। आज वह नहा- धोकर तैयार हो रही थी। मालिक उदास थे! पर मालकिन और उनके बच्चे प्रसन्न थे!
सारे लोग माँ को नीचे गाड़ी तक छोड़ने गये। मालिक को छोड़कर सभी के चेहरे पर बनावटी उदासी छायी थी, पर गोलू को बनावटीपन कहीं से पसंद नहीं था। वह आज कमरे से ही भौंक-भौंक कर बुढ़िया के जाने की खुशी मना रहा था। मालिक समझ ही पा रहे थे कि इस कुत्ते को आज हुआ क्या है???
डॉ.उमेश कुमार शर्मा
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