पिताजी लौट आए
देर रात थक-हारकर
बाजार की हर गली
हर चौराहे ही नहीं
झाड़ियों और नालों में खोजकर
वह नहीं मिली,
कहीं भी नहीं!
माँ की आँखें पथरा गयीं
दादी निःशब्द है
दादाजी उदास!
बहन को चैन कहाँ है?
पर हारा नहीं है अभी भाई
उसे उम्मीद है अब भी
कि वह लौट आएगी देर रात
करेगी सौ बहाने -
कभी सड़क जाम
तो कभी इसके-उसके मिल जाना का,
लेकिन किसे पता था ???
वह लौट आएगी अहले सुबह
एकदम शांत....
नि:शब्द..........
लथपथ...........
निष्प्राण...........।
डॉ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
देर रात थक-हारकर
बाजार की हर गली
हर चौराहे ही नहीं
झाड़ियों और नालों में खोजकर
वह नहीं मिली,
कहीं भी नहीं!
माँ की आँखें पथरा गयीं
दादी निःशब्द है
दादाजी उदास!
बहन को चैन कहाँ है?
पर हारा नहीं है अभी भाई
उसे उम्मीद है अब भी
कि वह लौट आएगी देर रात
करेगी सौ बहाने -
कभी सड़क जाम
तो कभी इसके-उसके मिल जाना का,
लेकिन किसे पता था ???
वह लौट आएगी अहले सुबह
एकदम शांत....
नि:शब्द..........
लथपथ...........
निष्प्राण...........।
डॉ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
0 Comments:
Post a Comment