नीलकंठ

नीलकंठ

कौन कहता है कि अब तुम याद नहीं आते कौन कहता है कि हमारी स्मृति में, हमारी कृति में, तुम नहीं हो! तुम्हीं तो थे जो जान लेते थे मेरे म...
कल

कल

'कल' कितना सुखकर होता है, जिसपर आज का बोझ लादकर हम निश्चिन्त हो जाते हैं। आज के भारी से भारी बोझ को उठा लेने में समर्थ होता है ...
यात्रा

यात्रा

पता नहीं! कितना सत्य है डार्विन का 'विकासवादी सिद्धांत' कि मानव का विकास हुआ पशुओं से(बंदरों से) झड़ गयी हमारी पूँछ होने लगे ख...
आजादी

आजादी

आजादी, कोई नन्हीं- सी, प्यारी-सी अबोध-सी बच्ची नहीं है, वह उछलती- कूदती बाला भी नहीं, वह किसी को लुभाने वाली स्त्री भी नहीं है, वह तो ...
कौन है वह

कौन है वह

कौन है वह! जो दंगे में शरीक है, जो पत्थर फेंकता है, जो घर जलाता है, जो सड़क जाम करता है! कहीं वह भूखा आदमी तो नहीं, जो अपनी रोटी के ल...
दंगा

दंगा

कौन कहता है कि दंगे में मुसलमान से हिन्दू  लड़ता है और हिन्दू से मुसलमान लड़ता है मैंने तो देखा कि दोनों के भीतर का हैवान , हैवान से लड...
कुछ सवाल

कुछ सवाल

कुछ सवाल मेरे मन में उठते हैं अक्सर कुछ सवाल कि क्या वे भी जलाते होंगे अगरबत्तियाँ जो रोज़ खुशबू रचते हैं, या यूँ ही महकता होगा उनका...