अछूत

अछूत

लघुकथा           महेसर ने हल पटक कर बैलों को सानी- पानी दिया और आंगन की ओर बढ़ते हुए कहा- "मालकिन....मालकिन.....अरे घर में कोई है कि...
राजमहल

राजमहल

राजमहल वह नहीं, जहाँ पर प्रतिक्षण हो रंग-रलियाँ। जहाँ वासना की बजती हो, नयी- नयी पैजनियाँ ।। बालाओ के अरुण अधर का होता हो नित चुम्बन...
कोशी- पुत्र

कोशी- पुत्र

कहानी 'किसन अधपगला है ! गंजेड़ी- भंगेड़ी है, जो मन में फुराता है, वही करने में रम जाता है! कोशी की कछेर में थोड़ी- सी जमीन क्या जगी, चला...