कभी हँसाती है जिंदगी
कभी रूलाती है जिंदगी
पर हौसला बुलंद हो तो
बीच से निकल जाती है जिंदगी।
सबकुछ मिलता नहीं है जहां में
जो चाहत लिए आती है जिंदगी
शिकायत तो यूँ ही बहुत इससे
अक्सर दगा ही दे जाती है जिंदगी।
कर्मवीरों ने बदल डाली है दुनिया
उसे भी कहाँ वक्श पाती है जिंदगी
यह लेती है इन्तहां भी बहुत
फल कुछ और ही दे जाती है जिंदगी।
देखा हमने भी बहुत शूरवीरों को
उसे भी धूल में मिलाती है जिंदगी
संघर्ष ही गर नियति है इसकी
तो इससे क्यों घबराती है जिंदगी।
डाॅ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार एवं ब्लाॅगर
कभी रूलाती है जिंदगी
पर हौसला बुलंद हो तो
बीच से निकल जाती है जिंदगी।
सबकुछ मिलता नहीं है जहां में
जो चाहत लिए आती है जिंदगी
शिकायत तो यूँ ही बहुत इससे
अक्सर दगा ही दे जाती है जिंदगी।
कर्मवीरों ने बदल डाली है दुनिया
उसे भी कहाँ वक्श पाती है जिंदगी
यह लेती है इन्तहां भी बहुत
फल कुछ और ही दे जाती है जिंदगी।
देखा हमने भी बहुत शूरवीरों को
उसे भी धूल में मिलाती है जिंदगी
संघर्ष ही गर नियति है इसकी
तो इससे क्यों घबराती है जिंदगी।
डाॅ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार एवं ब्लाॅगर
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