कितना बुरा है हमारा समय
जब बच्चे खेल रहे हैं हथियारों से
और जब युवा सो रहे हैं बेफिक्र
बिक रहा है देश और वह चश्मदीद है
परंपराओं, रूढ़ियों और अंधविश्वास के जालमें
लपेट दिया गया है उसे,
बस खुली हैं उनकी आँखें
ताकि वह देख सके
अपने सपनों की सौदेबाजी
और गर्व से कह सके कल
कि वह तब चश्मदीद था
जब बिक रहा था देश
और उसके सुनहले सपने।
कितना बुरा है हमारा समय
जब माएँ बेच रही हैं अपना कोख
ताकि भर पाए उसका पेट और कुछ दिन
कितना बुरा है समय
जब सौन्दर्य पर्याय है- स्त्री का
और सतीत्व सम्मान का मानक है।
कितना बुरा है हमारा समय
जब सारे रिश्ते तार-तार हो गये हैं
और रिश्तों की तह में बस फरेब है
वह बिक रहा है बिना किसी मोलभाव के।
कितना बुरा है हमारा समय
जब नेता सौदागर है और सौदागर नेता
वे भाषणों के गढ़ते हैं दिन में हमारे सपने
और रात को बेचते हैं उसे -अंधेरे में।
और..... और...और कितना बुरा समय है
कि हम केवल चश्मदीद हैं इस सौदागरी के।
डॉ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
सहरसा, बिहार
संपर्क- 6201464897
जब बच्चे खेल रहे हैं हथियारों से
और जब युवा सो रहे हैं बेफिक्र
बिक रहा है देश और वह चश्मदीद है
परंपराओं, रूढ़ियों और अंधविश्वास के जालमें
लपेट दिया गया है उसे,
बस खुली हैं उनकी आँखें
ताकि वह देख सके
अपने सपनों की सौदेबाजी
और गर्व से कह सके कल
कि वह तब चश्मदीद था
जब बिक रहा था देश
और उसके सुनहले सपने।
कितना बुरा है हमारा समय
जब माएँ बेच रही हैं अपना कोख
ताकि भर पाए उसका पेट और कुछ दिन
कितना बुरा है समय
जब सौन्दर्य पर्याय है- स्त्री का
और सतीत्व सम्मान का मानक है।
कितना बुरा है हमारा समय
जब सारे रिश्ते तार-तार हो गये हैं
और रिश्तों की तह में बस फरेब है
वह बिक रहा है बिना किसी मोलभाव के।
कितना बुरा है हमारा समय
जब नेता सौदागर है और सौदागर नेता
वे भाषणों के गढ़ते हैं दिन में हमारे सपने
और रात को बेचते हैं उसे -अंधेरे में।
और..... और...और कितना बुरा समय है
कि हम केवल चश्मदीद हैं इस सौदागरी के।
डॉ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
सहरसा, बिहार
संपर्क- 6201464897
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