तुम्हारे प्रेम-रस से सिंचित है
मेरा तन, मन और जीवन
तुम्हारे स्नेह से सराबोर है हम
तुमसे अनंत जीवन- सुधा पाकर
तृप्त है मेरा सर्वस्व मेरा जीवन
मेरे जीवन के आँगन की तुलसी हो
या राग हो मेरे बेराग जीवन का
संगीत हो तुम मेरे लिए प्रिय
तुम्हारी रश्मियों से आलोकित हैं हम
तुम आशा हो मेरे जीवन का
या वह शक्ति जो हम में है
हम तुम्हारे प्रेम के प्यासे हैं प्रिय
क्योंकि तुम्हारा प्रेम हमें रचता है।
डॉ.उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
मेरा तन, मन और जीवन
तुम्हारे स्नेह से सराबोर है हम
तुमसे अनंत जीवन- सुधा पाकर
तृप्त है मेरा सर्वस्व मेरा जीवन
मेरे जीवन के आँगन की तुलसी हो
या राग हो मेरे बेराग जीवन का
संगीत हो तुम मेरे लिए प्रिय
तुम्हारी रश्मियों से आलोकित हैं हम
तुम आशा हो मेरे जीवन का
या वह शक्ति जो हम में है
हम तुम्हारे प्रेम के प्यासे हैं प्रिय
क्योंकि तुम्हारा प्रेम हमें रचता है।
डॉ.उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
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