लघुकथा :
वर्मा जी सबेरे से भाषण लिखकर रट्टा मार रहे थे। उन्हें आज 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' पर भाषण देना था। उन्होनें अपने भाषण में-'भ्रूण- हत्या पर रोक', 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' ,'बाल -विवाह पर पाबंदी', 'स्त्री-स्वातंत्र्य' आदि कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया था।
वे अभी काॅलेज के लिए तैयार ही हुए थे कि बड़ी बेटी रेखा सामने आकर फिर खुशामद करने लगी- "पापा, प्लीज मेरे सारे दोस्त बी.ए. में एडमिशन करवा रहे हैं। मुझे भी एडमिशन करवाना है।"
"बोल दिया न कि अब तुम्हें आगे नहीं पढ़ना है। तेरी शादी तय हो चुकी है।" वर्मा जी गुर्राये।
"आप कब तक घर आएंगे?" मिसेज वर्मा डरते-डरते पूछी।
"जब मरज़ी होगी, तब! ज्यादा गार्जियन बनने की कोशिश मत करो, समझी!" वर्मा जी की आँखें लाल हो गयीं। "हाँ, याद आया तुम माँ के साथ हॉस्पीटल जाकर जाँच करवा लेना।मैंने डाक्टर मिश्रा को फोन कर दिया है। मुझे तीसरी बेटी नहीं चाहिए।"
इतना कहते हुए वर्मा जी गाड़ी में बैठ गये और भाषण के प्रमुख बिन्दुओं में मन ही मन दुहराने लगे।
डाॅ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
वर्मा जी सबेरे से भाषण लिखकर रट्टा मार रहे थे। उन्हें आज 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' पर भाषण देना था। उन्होनें अपने भाषण में-'भ्रूण- हत्या पर रोक', 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' ,'बाल -विवाह पर पाबंदी', 'स्त्री-स्वातंत्र्य' आदि कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया था।
वे अभी काॅलेज के लिए तैयार ही हुए थे कि बड़ी बेटी रेखा सामने आकर फिर खुशामद करने लगी- "पापा, प्लीज मेरे सारे दोस्त बी.ए. में एडमिशन करवा रहे हैं। मुझे भी एडमिशन करवाना है।"
"बोल दिया न कि अब तुम्हें आगे नहीं पढ़ना है। तेरी शादी तय हो चुकी है।" वर्मा जी गुर्राये।
"आप कब तक घर आएंगे?" मिसेज वर्मा डरते-डरते पूछी।
"जब मरज़ी होगी, तब! ज्यादा गार्जियन बनने की कोशिश मत करो, समझी!" वर्मा जी की आँखें लाल हो गयीं। "हाँ, याद आया तुम माँ के साथ हॉस्पीटल जाकर जाँच करवा लेना।मैंने डाक्टर मिश्रा को फोन कर दिया है। मुझे तीसरी बेटी नहीं चाहिए।"
इतना कहते हुए वर्मा जी गाड़ी में बैठ गये और भाषण के प्रमुख बिन्दुओं में मन ही मन दुहराने लगे।
डाॅ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
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