गांधीवाद का रिहर्सल

लघुकथा :        
            नेताजी एक बार नहीं, तीन-तीन बार अखबार के सारे पन्ने पलट गये। उनका नाम और तस्वीर कहीं नहीं! सबकुछ तो ठीक-ठाक हुआ था- लाईट....कैमरा....एक्शन। पी.ए. ने पूरा इंतजाम कर रखा था- पथिया भर सूखे पत्ते, बाँस के लंबे डंडे लगी झाड़ू,  कूड़ापात्र आदि-आदि। सब बेकार! मेहनत पर पानी फिर गया! जब तस्वीर 'गांधी जयंती' के अवसर पर छपी ही नहीं तो..........!
        वह गुस्से से लाल होकर अखबार के संपादक को फोन लगाया- "हम पूछते हैं कि तुम्हें अखबार चलाना है कि बंद करना हैं? सारी संपादकगिरी घुसेड़ देंगे।"
        "सर, सर गुस्सा न कीजिए, हम मोटे हेडलाइन के साथ आपके समाचार को कल के अखबार में छाप रहे हैं। कल शहर में एक बड़ी घटना घट गयी, इसलिए स्पेस नहीं मिल सका।"
         "लेकिन आज 'गांधी जयंती'.......।"
         "कोई बात नहीं सर, कल गाँव से लेकर शहर तक  देखेगा कि हमारे नेताजी सफाई के प्रति कितने सजग हैं।" संपादक ने उनके मुँह की बात छीन ली।
           उन्होंने अपना वादा पूरा किया। अगले दिन के अखबार में झाड़ू लगाते हुए नेताजी की बड़ी तस्वीर छपी। वे सफेद पजामे- कुर्ते और गांधी टोपी में, गांधी का साक्षात अवतार लग रहे थे। हेडलाइन था- "स्वच्छ भारत और स्वस्थ भारत ही हमारा लक्ष्य"।
        नेताजी इस समाचार को बार-बार पढ़ रहे थे और अपने चमचे को भी दिखा रहे थे,पर किसी की नजर नीचे छपे समाचार पर अबतक नहीं गई, जिसका हेडलाइन था- "गंदगी से शहर में फैली महामारी,11 मरे ,27 की हालत गंभीर"!

डाॅ.उमेश कुमार शर्मा
    युवा रचनाकार
SHARE

Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
    Blogger Comment
    Facebook Comment

0 Comments:

Post a Comment