लघुकथा :
सदियों से गुलामी के शिकार बैलों ने अपनी मुक्ति की लड़ाई लड़ने के लिए एक बैल को साँढ़ बना दिया। साँढ़ खा- पीकर खूब मोटा- ताज़ा तथा बलवान हो गया। अब वह साँढ़ अपने भाइयों को भूलकर गाय के पीछे लग गया। बैलों को बहुत दुःख हुआ। उसके सारे सपने चूर-चूर हो गये। फिर भी वे सभी मिलकर साँढ़ के पास अपना दुखड़ा सुनाने पहुँचे, लेकिन वहाँ तो उन्हें साँढ़ से मिलने भी नहीं दिया गया।साँढ़ ने अपनी सुरक्षा के लिए दर्जनों कुत्ते पाल रखे थे, जो बैलों को असभ्य समझकर केवल भौंके ही नहीं, कई बैलों को काटकर घायल भी कर दिये। वहाँ पहुँचकर उन्हें लगा कि साँढ़, साँढ़ होता है और बैल, बैल होता है!
प्रतीकार्थ : बैल= दलित-शोषित-पीड़ित
साँढ़= रामविलास,मायावती, लालू
गाय= राजनीति
शिकरी कुत्ते= पुलिस, सुरक्षाकर्मी।
डाॅ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
सदियों से गुलामी के शिकार बैलों ने अपनी मुक्ति की लड़ाई लड़ने के लिए एक बैल को साँढ़ बना दिया। साँढ़ खा- पीकर खूब मोटा- ताज़ा तथा बलवान हो गया। अब वह साँढ़ अपने भाइयों को भूलकर गाय के पीछे लग गया। बैलों को बहुत दुःख हुआ। उसके सारे सपने चूर-चूर हो गये। फिर भी वे सभी मिलकर साँढ़ के पास अपना दुखड़ा सुनाने पहुँचे, लेकिन वहाँ तो उन्हें साँढ़ से मिलने भी नहीं दिया गया।साँढ़ ने अपनी सुरक्षा के लिए दर्जनों कुत्ते पाल रखे थे, जो बैलों को असभ्य समझकर केवल भौंके ही नहीं, कई बैलों को काटकर घायल भी कर दिये। वहाँ पहुँचकर उन्हें लगा कि साँढ़, साँढ़ होता है और बैल, बैल होता है!
प्रतीकार्थ : बैल= दलित-शोषित-पीड़ित
साँढ़= रामविलास,मायावती, लालू
गाय= राजनीति
शिकरी कुत्ते= पुलिस, सुरक्षाकर्मी।
डाॅ. उमेश कुमार शर्मा
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