रोको!
उसे रोको!
पूरी सख्ती के साथ रोको!
उसे मत जानने दो उसका इतिहास
उसे काट दो उसकी परंपरा से
उसे मत जानने दो उसका अस्तित्व
उसके पाठ से जल्दी से हटा दो 'प्रजातंत्र'
नहीं तो पूछने लगेगा उसका मतलब
या फिर खोजने लगेगा उसका अर्थ
करने लगेगा तर्क और वितर्क
मचाने लगेगा वह उत्पात।
उसके कान में जल्दी से फूंक दो कोई 'धर्म-मंत्र'
उसके हाथ जल्दी से थमा दो 'मनु -स्मृति'
और कहो कि यही है उसका संविधान
इससे पहले कि वह बन जाए इन्सान
लगा दो मोहर, बना दो हिन्दू या मुसलमान
भर दो उनकी नसों में साम्प्रदायिकता के कीड़े
नहीं तो ये बच्चे कल खोजने लगेंगे 'राष्ट्र' का अर्थ
करने लगेंगे अनगिनत, अनुत्तरित प्रश्न,
जिसका जबाब कोई दे न सकेगा!
उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार।
उसे रोको!
पूरी सख्ती के साथ रोको!
उसे मत जानने दो उसका इतिहास
उसे काट दो उसकी परंपरा से
उसे मत जानने दो उसका अस्तित्व
उसके पाठ से जल्दी से हटा दो 'प्रजातंत्र'
नहीं तो पूछने लगेगा उसका मतलब
या फिर खोजने लगेगा उसका अर्थ
करने लगेगा तर्क और वितर्क
मचाने लगेगा वह उत्पात।
उसके कान में जल्दी से फूंक दो कोई 'धर्म-मंत्र'
उसके हाथ जल्दी से थमा दो 'मनु -स्मृति'
और कहो कि यही है उसका संविधान
इससे पहले कि वह बन जाए इन्सान
लगा दो मोहर, बना दो हिन्दू या मुसलमान
भर दो उनकी नसों में साम्प्रदायिकता के कीड़े
नहीं तो ये बच्चे कल खोजने लगेंगे 'राष्ट्र' का अर्थ
करने लगेंगे अनगिनत, अनुत्तरित प्रश्न,
जिसका जबाब कोई दे न सकेगा!
उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार।
प्रजातंत्र पर प्रहार
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