किसी भी राष्ट्र अथवा समाज के विकास में शिक्षा की भूमिका अहम् होती है।लेकिन शिक्षा की भूमिका तभी सकारात्मक मानी जा सकती है, जब वह गुणवत्तापूर्ण हो,जीवनोपयोगी हो तथा विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करने में सक्षम हो।आज सरकारी तथा गैर-सरकारी स्तरों पर शिक्षा के विकास के लिए अनेक तरह के प्रयास किये जा रहे हैं। साथ ही शिक्षा को सर्वोत्तम बनाने की कोशिश भी की जा रही है, परन्तु हमारा देश अब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में वैश्विक स्तर को प्राप्त नहीं कर सका है! दुनिया के टाॅप-100 विश्वविद्यालयों में भारत के एक भी विश्वविद्यालय शामिल नहीं हैं! यह हास्यास्पद है।
आज ज्ञान के अनेक क्षेत्र का पदार्पण हो चुका है, जिन्हें विकसित करने में सूचना और संचार तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी है। यही कारण है कि अब शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए भी संचार माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है। संचार के प्रमुखतः दो रूप हैं-प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। प्रिंट मीडिया में अखबार तथा पत्र-पत्रिकाओं को रखे जाते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर तथा इंटरनेट आदि को। सूचना और संचार के इन माध्यमों पर गंभीरता से विचार करें, तो शिक्षा के विकास में इसके दोनों रूपों का योगदान है। यह अलग बात है कि आज की पीढ़ी प्रिंट मीडिया के बजाय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की गिरफ्त में आ चुका है। उनका अधिकांश समय स्मार्ट फोन या टेलीविजन पर व्यतीत होता है।
इसी कारण छोटे स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक की शिक्षा में सूचना और संचार तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। हर जगह स्मार्ट क्लास का क्रेज बढ़ रहा है। सरकारी तथा गैर-सरकारी स्तरों पर शिक्षा के विकास के लिए अच्छे शिक्षकों का विडियो कान्फ्रेंसिंग करवाया जा रहा है। और इसके सहारे देश भर के विद्यार्थी घर बैठे उत्तम ज्ञान का अर्जन कर रहे हैं। दूरस्थ शिक्षा विभाग ने भी अपने विद्यार्थियों के लिए आॅन लाईन क्लास का प्रबंध कर दिया है। रेडियो पर भी अनेक शैक्षिक कार्यक्रमों का प्रसारण किया जा रहा है। यू-ट्यूब पर ज्ञान की बातें विशेषज्ञों के माध्यम से प्रसारित किये जा रहे हैं। ब्लॉग तथा ट्यूटर के सहारे सर्वोत्तम सूचनाएँ शीघ्रता के साथ जन-जन तक पहुँचे रहे हैं। यानी सूचना और संचार तकनीक ने शिक्षा, शिक्षक और विद्यालय को शिक्षार्थी के घर तक ला दिया है।
अस्तु, सूचना और संचार तकनीक के सहारे ही आधुनिक शिक्षा में गुणैवत्ता लायी जा सकती है,शिक्षा को घर-घर तक पहुँचायी जा सकती है तथा शिक्षित भारत और समर्थ भारत का स्वप्न साकार किया जा सकता है।
डॉ.उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
आज ज्ञान के अनेक क्षेत्र का पदार्पण हो चुका है, जिन्हें विकसित करने में सूचना और संचार तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण हो गयी है। यही कारण है कि अब शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए भी संचार माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है। संचार के प्रमुखतः दो रूप हैं-प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। प्रिंट मीडिया में अखबार तथा पत्र-पत्रिकाओं को रखे जाते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर तथा इंटरनेट आदि को। सूचना और संचार के इन माध्यमों पर गंभीरता से विचार करें, तो शिक्षा के विकास में इसके दोनों रूपों का योगदान है। यह अलग बात है कि आज की पीढ़ी प्रिंट मीडिया के बजाय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की गिरफ्त में आ चुका है। उनका अधिकांश समय स्मार्ट फोन या टेलीविजन पर व्यतीत होता है।
इसी कारण छोटे स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक की शिक्षा में सूचना और संचार तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। हर जगह स्मार्ट क्लास का क्रेज बढ़ रहा है। सरकारी तथा गैर-सरकारी स्तरों पर शिक्षा के विकास के लिए अच्छे शिक्षकों का विडियो कान्फ्रेंसिंग करवाया जा रहा है। और इसके सहारे देश भर के विद्यार्थी घर बैठे उत्तम ज्ञान का अर्जन कर रहे हैं। दूरस्थ शिक्षा विभाग ने भी अपने विद्यार्थियों के लिए आॅन लाईन क्लास का प्रबंध कर दिया है। रेडियो पर भी अनेक शैक्षिक कार्यक्रमों का प्रसारण किया जा रहा है। यू-ट्यूब पर ज्ञान की बातें विशेषज्ञों के माध्यम से प्रसारित किये जा रहे हैं। ब्लॉग तथा ट्यूटर के सहारे सर्वोत्तम सूचनाएँ शीघ्रता के साथ जन-जन तक पहुँचे रहे हैं। यानी सूचना और संचार तकनीक ने शिक्षा, शिक्षक और विद्यालय को शिक्षार्थी के घर तक ला दिया है।
अस्तु, सूचना और संचार तकनीक के सहारे ही आधुनिक शिक्षा में गुणैवत्ता लायी जा सकती है,शिक्षा को घर-घर तक पहुँचायी जा सकती है तथा शिक्षित भारत और समर्थ भारत का स्वप्न साकार किया जा सकता है।
डॉ.उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
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