लघुकथा
"खून! उन्हें खून चाहिए! 'ओ पोजिटिव', तीन यूनिट। अभी तुरंत।" डॉक्टर फरमान जारी करते हुए कमरे से बाहर आ गये।
उनकी हालत प्रसव -पीड़ा से लगातार बिगड़ती जा रही थी। मैंने शहर के सभी ब्लड बैंक को छान मारा, पर 'ओ पोजिटिव' मिलना दुर्लभ था। मैं हारकर पुनः अपनी कराहती हुई पत्नी के कमरे में जाने लगा,लेकिन मेरे पैर ठिठक गए। मानो भीतर कोई खूंखार शेर मुझे चीर देने को तैयार बैठा हो। मेरे सारे सजे- सजाए हुए सपने भीतर ही भीतर चरमराकर टूटते-बिखरते जा रहे थे।
लेकिन मुझे तो सच का सामना करना था। हिम्मत जुटाकर भीतर दाखिल हुआ। देखा कि पत्नी शांति से सो रही है, बगल के बेड पर लेटकर रक्तदान की स्वयंसेवी संस्था चलाने वाली अस्मिता दीदी उसे खून दे रही है। साथ में दो और 'ओ पोजिटिव' वाले भैया अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
अस्मिता दीदी! वही अस्मिता दीदी, जिसे पिछले महीने मैंने 'रक्तदान' करने को कहने पर दुत्कारते हुए कहा था- "इन सब फालतू चीज़ों के लिए मेरे पास वक्त नहीं है।बकबास कहीं और जाकर करो।"
मैं यह सब सोच- सोच कर आत्मग्लानि से जमीन में धँसा जा रहा था, पर वह अब भी मुस्कुरा रही थी, क्योंकि उन्हें खून की असली कीमत का पता था।
उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
सहरसा, बिहार।
"खून! उन्हें खून चाहिए! 'ओ पोजिटिव', तीन यूनिट। अभी तुरंत।" डॉक्टर फरमान जारी करते हुए कमरे से बाहर आ गये।
उनकी हालत प्रसव -पीड़ा से लगातार बिगड़ती जा रही थी। मैंने शहर के सभी ब्लड बैंक को छान मारा, पर 'ओ पोजिटिव' मिलना दुर्लभ था। मैं हारकर पुनः अपनी कराहती हुई पत्नी के कमरे में जाने लगा,लेकिन मेरे पैर ठिठक गए। मानो भीतर कोई खूंखार शेर मुझे चीर देने को तैयार बैठा हो। मेरे सारे सजे- सजाए हुए सपने भीतर ही भीतर चरमराकर टूटते-बिखरते जा रहे थे।
लेकिन मुझे तो सच का सामना करना था। हिम्मत जुटाकर भीतर दाखिल हुआ। देखा कि पत्नी शांति से सो रही है, बगल के बेड पर लेटकर रक्तदान की स्वयंसेवी संस्था चलाने वाली अस्मिता दीदी उसे खून दे रही है। साथ में दो और 'ओ पोजिटिव' वाले भैया अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
अस्मिता दीदी! वही अस्मिता दीदी, जिसे पिछले महीने मैंने 'रक्तदान' करने को कहने पर दुत्कारते हुए कहा था- "इन सब फालतू चीज़ों के लिए मेरे पास वक्त नहीं है।बकबास कहीं और जाकर करो।"
मैं यह सब सोच- सोच कर आत्मग्लानि से जमीन में धँसा जा रहा था, पर वह अब भी मुस्कुरा रही थी, क्योंकि उन्हें खून की असली कीमत का पता था।
उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
सहरसा, बिहार।
सुंदर
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