मैं यह नहीं कहता कि
मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर या गुरुद्वारा
न बनवाया जाए,
जरूर बनवाया जाए,
बल्कि वह भूकंपरोधी हो
ईश्वर की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए,
लेकिन तब,
जब हमारे देश में कोई 'बेघर' न हो।
मैं यह नहीं कहता
कि मेवे, मिश्री, दूध- घी और
ताज़े सुस्वादु फलों से
से उनका भोग न लगाया जाए,
जरूर लागाया जाए,
उनके स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाए,
लेकिन तब,
जब हमारे देश में कोई भूखा न हो
कोई कुपोषित न हो।
मैं यह नहीं कहता
कि ईश्वर को कपड़े और गहने न दिया जाए,
खूब दिया जाए
उनके सौंदर्य का पूरा ध्यान रखा जाए,
लेकिन तब,
जब हमारे देश में कोई नंगा न हो।
मैं यह नहीं कहता
कि ईश्वर के समक्ष बैठकर
वेदों- मंत्रों का पाठ न किया जाए,
'कुरान' की आयतें या कलमा न पढ़ा जाए,
'बाईबल' या 'गुरुग्रन्थ' न सुनाया जाए,
सुनाया जाए,
जी भर कर सुनाया जाए,
लेकिन तब,
जब हमारे देश में कोई निरक्षर न हो।
उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार।
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