वर्तमान समय में हम सभी वैश्विक महामारी (कोरोना) से जूझ रहे हैं। इसने अतीत में हुए विनाश के समस्त प्रतिमानों को ध्वस्त कर दिया है। लाखों लोगों की जान जा चुकी है और करोड़ों लोग अभी पिस रहे हैं इस महामारी की भीषण चक्की में। दुनियाभर के वैज्ञानिक इस संकट से मानव को उबारने का प्रयत्न कर रहे हैं। अभी जो समाधान मिला है वह केवल कोरोना से लड़ने का संबल है। उससे पूरी तरह रक्षा संभव नहीं हो सका है। लोग बचाव के लिए तरह-तरह के साधन अपना रहे है। योग इस संकट से मुक्त होने का मजबूत साधन बन चुका है। अभी योग की महत्ता बहुत बढ़ गयी है। योग वास्तव में तन और मन दोनों को स्वस्थ करता है। हमारे प्राचीन मनीषियों ने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग का ईजाद किया,जिसका फैलाव आज विश्व स्तर पर देखा जा सकता है।
योग केवल एक विशेष प्रकार का शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिससे तन और मन की बिखरी हुई शक्तियों का एकीकरण हो जाता है। जो आज के मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या है। योग में खासकर तीन चीजें होती हैं- व्यायाम, ध्यान और आसन। योग में निर्दिष्ट व्यायाम सामान्य व्यायाम से पृथक होता है, क्योंकि यह एक सतत प्रक्रिया है, जो जीवनपर्यंत चलता रहता है। इससे कई तरह की शारीरिक विकृति तथा दुर्बलताएँ दूर हो जाती हैं। सामान्य व्यायाम जहाँ केवल शरीर को बाहर से स्वस्थ और मजबूत बनाता है, वहीं योग मानव शरीर को बाहर तथा अंदर से स्वस्थ कर देता है। योग एक तरह का आत्मानुशासन है।
योग में निर्दिष्ट ध्यान मानसिक स्वास्थ्य के लिए वरदान है। इससे मन-मस्तिष्क की बिखरी हुई समस्त ऊर्जा संयोजित हो जाती है, जिससे मनुष्य चमत्कारिक सफलता अर्जित कर सकता है। सर्वविदित है कि मानव के भीतर अनंत शक्तियाँ हैं, जिनसे बड़ी-बड़ी सफलताएँ अर्जित की जा सकती है, पर अधिकांश मनुष्य जीवनपर्यंत इस शक्ति से अंजान रह जाता है। ध्यान इसी शक्ति का बोध और जागरण है।
योग का तीसरा आयाम है आसन। योगाचार्यों ने अनेक तरह के आसन को विकसित किया है, जिनसे अनेक तरह की व्याधियों का ईलाज संभव हो गया है। वर्तमान चिकित्सा विज्ञान अत्यंत विकसित होने के बावजूद भी कई रोगों से निजात दिलाने में अक्षम है, जैसे मानसिक अवसाद, तनाव आदि, परंतु योग ने इन समस्याओं का स्थाई समाधान खोज लिया है।
वैश्विक महामारी के दौर में योग की महत्ता इसलिए बढ़ गई है कि यह रोग से लड़ने की अपूर्व शक्ति प्रदान करता है। भीतर और बाहर से मनुष्य को सबल बनाता है। यह मानव शरीर को इस तरह तैयार करता है कि वह किसी भी संकट का सामना कर सके। योग से मानव शरीर में अद्भुत रोग प्रतिरोधी शक्ति का विकास होता है, जिससे मानव शरीर महामारी से लड़ने और उससे बचने का मार्ग खोज लेता है।
वर्तमान समय में जिस 'इम्युनिटी' की बात आमतौर पर की जा रही है, उसे योग ने बहुत पहले विकसित कर लिया है। योग ही एक ऐसा मजबूत संबल है, जिसके सहारे हम वैश्विक महामारी जैसे संकट से मुक्त हो सकते हैं। भारत में जिस योग का प्रवर्तन हुआ, देर से ही सही, पर पूरी दुनिया ने इसकी महत्ता स्वीकार कर ली है। यह सर्वविदित है कि योग से शारीरिक एवं मानसिक विकारों का स्थायी समाधान हो जाता है।
बहरहाल, वैश्विक महामारी से मुक्त होने का यह एक सशक्त साधन हो सकता है। अन्य चिकित्सा -पद्धति के समान ही योग के क्षेत्र में भी नित नये प्रयोग हो रहे हैं, तमाम समस्याओं के समाधान खोजे जा रहे हैं। इससे जाहिर होता है कि समय चाहे कितना ही क्यों न बदल जाए, योग का महत्त्व कम नहीं हो सकता है। अगर हम सभी योग को दिनचर्या में शामिल कर लें तो जीवन सुखमय और आनंदमय हो जाएगा।
डाॅ.उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार एवं ब्लाॅगर
संपर्क : 6201464897
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