देखो!
वह फिर आया
तुम्हारी बस्ती में
पाँच साल बाद
भगवान् से इन्सान बनकर
तुम्हारे दर्द को सहलाने
तुम्हारे मन को बहलाने
कुछ देकर फुसलाने
देखना वह फिर बहाएगा घड़ियाली आँसू
लेट जाएगा तुम्हारी टूटी खाट पर
तुम्हारे घर खाएगा मांग कर सूखी रोटी
वह दिखाएगा तुम्हें स्वप्न रामराज का
वह बताएगा खुद को गांधी का संतान
वह तुम्हारे साथ ही जाएगा मंदिर
और अगले ही दिन पढ़ता हुआ मिलेगा नमाज़
किसी मस्जिद में टोपी पहन कर
मगर देखना कहीं तुम्हें फिर से न पहना दे टोपी
पाँच साल के लिए!
कहीं वह फिर से न खरीद ले
तुम्हारे बच्चों के सपने
एक धोती, एक साड़ी या चंद सिक्कों के मोल पर
चूँकि वह सौदागर है सपनों का!
उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार।
वह फिर आया
तुम्हारी बस्ती में
पाँच साल बाद
भगवान् से इन्सान बनकर
तुम्हारे दर्द को सहलाने
तुम्हारे मन को बहलाने
कुछ देकर फुसलाने
देखना वह फिर बहाएगा घड़ियाली आँसू
लेट जाएगा तुम्हारी टूटी खाट पर
तुम्हारे घर खाएगा मांग कर सूखी रोटी
वह दिखाएगा तुम्हें स्वप्न रामराज का
वह बताएगा खुद को गांधी का संतान
वह तुम्हारे साथ ही जाएगा मंदिर
और अगले ही दिन पढ़ता हुआ मिलेगा नमाज़
किसी मस्जिद में टोपी पहन कर
मगर देखना कहीं तुम्हें फिर से न पहना दे टोपी
पाँच साल के लिए!
कहीं वह फिर से न खरीद ले
तुम्हारे बच्चों के सपने
एक धोती, एक साड़ी या चंद सिक्कों के मोल पर
चूँकि वह सौदागर है सपनों का!
उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार।
नेता जी सफल हो भी जाते है
ReplyDelete