शुद्धता और दीपावली


लघुकथा

शुद्धता और दीपावली

  जगेसर ने अपना तौलिया कंधा पर लिया और सीधे पंडित रामरूप के घर की ओर चल पड़ा ।दीपावली का दिन था, पूरा वातावरण उत्सवी था ।लेकिन उनके भीतर तूफान चालू था -खेल है क्या, गाँव भर का आदमी दीपावली पर मिट्टी का दीया नहीं जलाएगा ? बिजली बत्ती जलाएगा ! शुध मिट्टी के लछमी -गनेश की पूजा नहीं करेगा ,चीनी मिट्टी और प्लास्टिक का भगवान घर लाएगा ! बिजली आ गयी तो क्या बाप दादा की परंपरा को भुला देगा ?
         जगेसर तब से ही पगला गया था,जब से रामपुर वाली उसकी बेटी डोमनी पथिया में दो सेर मक्कै लेकर वापस आई थीं -पूरे दिन घूमने पर दो सेर मक्कै !.....दीया, डिबरी, मलसी चौमुहाँ, दीप ,धुपदानी और रंग-बिरंगे हर साईज के लछमी -गणेश वैसे ही धरे रह गये ।
        जगेसर गुस्से से तिलमिला गया-'गाँव का आदमी साला फैशन के चक्कर में पगला गया है ।' वह पंडित रामरूप के घर पहुँचा
तो वे पूजा पर बैठ चुके थे ।घर के चारों तरफ बिजली की लड़ियाँ लगी थीं ।मानो घर रोशनी में नहा रहा हो । रामरूप के आगे एक पीतल का नया दीप जल रहा था।आगे चीनी मिट्टी के लक्ष्मी- गणेश विराजमान थे।
      जगेसर मन ही मन पंडित को गरियाते हुए उलटे पाँव वापस हो गया -'जब पंडित को ही शुध-अशुध पता नहीं है तो लोग क्या समझेगा चूल्हे का भाड़ ?'
         जगेसर घर आया तो देखा कि उसका बेटा भी कहीं से दो लड़ियाँ लाकर छप्पर पर लटका दिया था  ।उसके घर में भी चीनी मिट्टी के लक्ष्मी - गणेश स्थापित हो चुके हैं । वह लाल हो गया-" साला तूँहू लोग पगला गया है - यह सब अशुध होता है।"जगेसर इतना कहा ही था कि उनकी आँखे चौंधिया गयी ।पथिया के सारे दीप जल रहे थे- जगमग-जगमग ।लछमी गणेश की आँखें चमक रही थीं- चकमक चकमक ।मानो वे अपनी शुद्धता का प्रमाण दे रहे हों ।
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Milan Tomic

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