पंडितों,
कब तक करोगे पाठ
वेद,उपनिषद् और
पुराणों का
कब तक करोगे
चलीसा पाठ
इन देवताओं के सामने,
जिन्हें उकेरा है
किसी शिल्पकार ने
छेनियों से मार-मार कर
बेजान पत्थरों में।
पंडितों,
कब तक करोगे प्रतीक्षा
त्रिनेत्र खुलने की
जो पत्थरों में
पत्थरों के बने हैं।
पंडितों,
तुम्हारे पुरखे ने भी
किया था खूब पाठ
फिर कैसे नहीं टूटा
तुम्हारा भ्रम आजतक
कि पत्थरों मे कभी
कान नहीं उग सकते ।
उमेश कुमार शर्मा
हिन्दी विभाग
लनामिवि,दरभंगा
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