बालक : "पापाजी! जब हमारे देश में प्रजातंत्र है, तब नेता के बेटे ही क्यों नेता बनते हैं?
पिता : "बेटा! तुम्हारे दादाजी क्या हैं?
बालक : "किसान।"
पिता : "मैं क्या हूँ?"
बालक : "किसान।"
पिता : "तुम्हें क्या बनना है?"
बालक : "किसान।"
पिता : "तो मतलब यह न कि 'किसानी' तुम्हें विरासत में मिली है।"
बालक : "जी।"
पिता : "ठीक इसी तरह नेताओं को भी विरासत.......!"
बालक : "बस पापा जी.... रहने दीजिए.....सब समझ गये। यहाँ प्रजातंत्र नहीं 'वंशतंत्र' है!"
डाॅ. उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार और ब्लाॅगर
संपर्क :6201464897
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