माँ अब नहीं सेंकती हैं रोटियाँ
मिट्टी के चूल्हे जलाकर
खपरी या तबे पर।
अब यह काम
नेताओं ने पकड़ लिया है
अब वे ही सेंकते हैं रोटियाँ
सियासत के
धर्म के चूल्हे जलाकर
जातिवाद के तबे पर,
तभी तो
भूखे सो जाते हैं बच्चे
और भूखी है जनता।
उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार।
सहरसा, बिहार।
मिट्टी के चूल्हे जलाकर
खपरी या तबे पर।
अब यह काम
नेताओं ने पकड़ लिया है
अब वे ही सेंकते हैं रोटियाँ
सियासत के
धर्म के चूल्हे जलाकर
जातिवाद के तबे पर,
तभी तो
भूखे सो जाते हैं बच्चे
और भूखी है जनता।
उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार।
सहरसा, बिहार।
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