समय
हम तुमसे
कदमताल करना चाहते हैं
हम तुम्हारे हरेक क्षण पर
कदम रखकर
साथ चलना चाहते हैं,
लेकिन तुम यह न समझना
कि हम तुमसे होड़ कर बैठे
और यह संभव भी नहीं
तुम देवता हो
तुम ही आदि और अंत हो
तुम ही कोटिक पतझड़
और वसंत हो
तुम ही दिशा
और दिगन्त हो
हम तुम्हारा शिष्य बनकर
तुम्हारे ही पदचिह्नों पर
तुम्हारी ही गति से
चलना चाहते हैं
हम तुमसे अतीत का कण लेकर
भविष्य का सृजन चाहते हैं।
उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
Bahut achha hai,sir
ReplyDeleteBahut hi Achchhi kavita
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