भगवान,
तुमने मुझे बनाया
इस जगत में लाया
दो पैर दिये
दो हाथ
दो आँखें
दो कान
एक दिल
एक दिमाग
बस्स...बस..बस
बहुत हुआ
मैं कृतज्ञ हूँ
मुझे विश्वास है
तुम्हारी सत्ता में,
पर अब
और लज्जित न करो
हे कृपानिधान
मुझे परिचित होने दो
जीवन और जगत से
भोगने दो जीवन-दंश
खा लेने दो ठोकर
मुझे खुद ही लिखने दो
अपना भाग्य
शायद भोगकर
कुछ बेहतर लिखूँ !
उमेश कुमार शर्मा
युवा रचनाकार
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