"वत्स! तुम्हारा मुँह क्यों लटका है?... क्या हुआ?" चेले को उदास देखकर गुरु ने प्रश्न किया।
"पढ़- लिखकर बेरोजगार बैठा हूँ गुरुदेव! इसलिए मुँह लटका है!"
कुछ दिनों बाद चेले को पसन्द की नौकरी मिल गई, लेकिन वह तब भी उदास था।
"वत्स!अब तो नौकरी मिल गई। अब क्यों तुम्हारा मुँह लटका है।" गुरु ने फिर प्रश्न किया।
"गुरुदेव! शादी के लिए पसंद की लड़की नहीं मिल रही है, इसलिए परेशान हूँ!"
कुछ दिनों बाद चेले की मनपसंद शादी हो गई, लेकिन वह तब भी उदास था।
"वत्स!अब तो अच्छी शादी भी हो गई। अब क्यों मुँह लटका है। बोलो।" गुरु ने फिर प्रश्न किया।
"गुरुदेव! इस मुँह को लटके रहने की आदत हो गई है। ये अब ऐसा ही रहेगा।" चेला ने सीधा जवाब दिया।
फिर गुरु चुप! चेला चुप!
- डाॅ.उमेश कुमार शर्मा
युवा साहित्यकार
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