कूड़ेदान की आत्मव्यथा



"आपका शुभ नाम?"
"कूड़ेदान"
"पिता ?"
"कूड़ा गाड़ी "
"पत्नी का नाम ?"
"डस्टबिन"
"बाल-बच्चा ?"
"बड़ा बेटा-पीकदान,छोटा-ऐश ट्रे।"
"आवास ?"
"सड़क किनारे ।"
"हाँ,अब क्या कष्ट है,बोलिए ?"
"क्या बताए सरकार कि  केतना कष्ट है, हमर सब के त' जिनगिये नरक है।लोग सड़क छाप समझता है।कोन इज्जत बाँकी है।ऊपर से समाज में ऐतना न' गंदगी फैल गया है कि उठाते- उठाते हमर पेट में गैस बनने लगा है।ई देखो आ गई बड़का के कान पकड़ले।केतना बेशरम है, इ जनानी, दोसरा के बाल- बच्चा के तनिको दरद नहीं समझती है।.....कल त' हद पार कर दी, कहाँ से ऊ नरक पन्नी में गठियाए हुए लायी और हमर पेट में धर के चल दी .....तनिको नहीं सोची कि मरद जात है....।
        ई समाज के लोग हमरो परिवार के फोड़ के रख दिया है.......पत्नी सप्ताह में एक बार मिलने आती है.... जब तक आँख मिले कि लेके चंपत।ओकर दुख त' हमरा से देखल नहीं जा रहा है..... पूरे घर का सड़ल- गलल.....छी-छी.....पिछले दिन आई तो रो - रो के कहने लगी- "पीकू के पापा अब और दुख नहीं सहल जा रहा है।आधी रात गये ....की लाके धर दिया ऊ जनानी हमर पेट में कि मन ओकियाने लगा....रात त' मानो पहाड़ हो गई...कब भोर हो कि प्राण बचे।"
        हम अपन दुख कैसे बताते कि गली- मुहल्ले का कुत्ता, साला जेतना बार उधर से गुजरता है, पिछला टांग उठा के हमरा देह पर दो बून मूत लेता है।
        हम ओकर आँसू पोछ दिये- " मत रोओ पीकू के मम्मी ,एक दिन हमरो सब के उधार होगा ।भगवान के घर में देर है, अंधेर नहीं।"

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Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

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