बरबरीक ,
हँसो ,जोर से हँसो
और जोर से
पांडवों की कायरता पर
कृष्ण की कपट पर
राम के दंभ पर
द्रोण की दुष्टता पर,
क्योंकि आज तुम
महाभारत का नायक होगा
तुम्हारा राज्याभिषेक किया जाएगा
एकलव्य के कटे हुए अंगूठे से
तुम्हारा राजतिलक होगा
और तुम्हारा राजगुरु होगा महात्मा शंबूक
सेनानायक होगा एकलव्य,
क्योंकि हिम में जाकर
गल गया है दंभी राम
मिट्टी में मिल गया है दुष्ट द्रोण
धराशायी हो गया है कृष्ण
बदल गया है देश और काल
लिखा जाएगा नया इतिहास,
जिसका नायक होगा बरबरीक,शंबूक और एकलव्य ।
उमेश कुमार शर्मा
युवा लेखक और ब्लागर
Vah kya likha hai aapne
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